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भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं प्रतिभा पाटिल

25 जुलाई 2007 का दिन भारत के इतिहास में एक ऐसी सुबह लेकर आया। जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई। इस दिन, श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने भारत की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

Ankit Maurya

Ankit Maurya

Writer | Educator | Tech & Learning Enthusiast

भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं प्रतिभा पाटिल
एक साधारण पृष्ठभूमि से शिखर तक

श्रीमती प्रतिभा पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को नदगांव, महाराष्ट्र में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार से आने वाली प्रतिभा पाटिल ने प्रारंभिक शिक्षा जलगांव से प्राप्त की। उन्होंने राजनीति विज्ञान और कानून में उच्च शिक्षा प्राप्त की और फिर वकालत करने लगीं।

बहुत कम उम्र में ही उन्होंने सामाजिक मुद्दों में रुचि लेना शुरू किया और जल्द ही राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। 1962 में मात्र 27 वर्ष की उम्र में वे पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य बनीं। इस शुरुआत ने उन्हें आगे चलकर एक लंबी राजनीतिक यात्रा की ओर अग्रसर किया।

प्रत्यभा पाटिल ने अपने राजनीतिक करियर में कई प्रमुख जिम्मेदारियाँ निभाईं। वे राज्य मंत्री और कैबिनेट मंत्री के रूप में महाराष्ट्र सरकार में कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में भी शिक्षा, सामाजिक कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे मंत्रालयों में अहम भूमिका निभाई। 2004 से 2007 तक वे राजस्थान की राज्यपाल रहीं — और वहां भी उनका कार्यकाल सादगी और निष्पक्षता का प्रतीक रहा। उनके व्यक्तित्व में एक खास बात थी — शांति, सादगी और दृढ़ निष्ठा। शायद यही कारण था कि 2007 में जब राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुना गया। तो कांग्रेस और यूपीए गठबंधन ने सर्वसम्मति से प्रतिभा पाटिल का नाम आगे बढ़ाया।

25 जुलाई 2007 भारत को पहली महिला राष्ट्रपति मिली 

आज की तारीख – 25 जुलाई – सिर्फ़ एक कैलेंडर की तारीख़ नहीं है। बल्कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वो पन्ना है जहाँ एक नया अध्याय लिखा गया था। ठीक 17 साल पहले, 25 जुलाई 2007 को भारत ने न सिर्फ़ एक नया राष्ट्रपति चुना।बल्कि एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जिसने सदियों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ दिया।

उस दिन हर तरफ़ एक अलग ही उत्साह का माहौल था। टीवी पर लाइव प्रसारण चल रहा था अख़बारों की सुर्खियाँ थीं और हर भारतीय दिल में एक गर्व का अनुभव कर रहा था। ये वो क्षण था जब देश ने सामूहिक रूप से महसूस किया कि हम एक ज़्यादा प्रगतिशील और समावेशी भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

“एक मजबूत और समावेशी भारत के लिए...”

राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक प्रांगण में जब प्रतिभा पाटिल ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो वह पल सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और सम्मान का क्षण था। उन्होंने कहा: “मैं हर भारतीय के लिए काम करूंगी — विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो अभी भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं।” उनकी इस शपथ में न केवल संवैधानिक जिम्मेदारियों की गूंज थी। बल्कि भारत की आधी आबादी के आत्मविश्वास की झलक भी दिखाई दी। शपथ ग्रहण समारोह में, उनके शब्द आज भी गूंजते हैं। उन्होंने बड़ी ही विनम्रता और दृढ़ता के साथ कहा था। "आइए हम सब मिलकर एक मजबूत और समावेशी भारत के लिए काम करें।" इन शब्दों में सिर्फ़ एक औपचारिकता नहीं थी। बल्कि एक ऐसी प्रतिज्ञा थी जो देश के हर वर्ग हर समुदाय को साथ लेकर चलने का आह्वान कर रही थी। उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की जहाँ कोई भी पीछे न छूटे जहाँ हर किसी को समान अवसर मिलें और जहाँ विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त बने।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

प्रतिभा पाटिल का राष्ट्रपति बनना महज़ एक राजनीतिक घटना नहीं थी। ये भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का एक मील का पत्थर था। दशकों से चले आ रहे सामाजिक बंधनों और लैंगिक भेदभाव की ज़ंजीरों को तोड़ते हुए उन्होंने दिखाया कि समर्पण कड़ी मेहनत और जनसेवा का जज़्बा किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है। उनकी जीत ने हर उस छोटी बच्ची की आँखों में चमक भर दी होगी जो स्कूल जाती थी। या उस महिला के चेहरे पर मुस्कान लाई होगी जो रोज़मर्रा के संघर्षों से जूझ रही थी। यह इस बात का प्रमाण था कि एक ऐसे देश में जहाँ महिलाओं को अक्सर सामाजिक बेड़ियों में जकड़ा जाता रहा है। सर्वोच्च संवैधानिक पद भी अब उनकी पहुँच में है।

उन्होंने न सिर्फ संविधान की रक्षा की बल्कि महिलाओं के लिए एक ऐसा उदाहरण पेश किया कि सपनों को पूरा किया जा सकता है चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो। उनके कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी महिलाओं के अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया ग्रामीण भारत की आवाज़ को मजबूत करने की कोशिश की और हमेशा एक संतुलित निष्पक्ष और गरिमापूर्ण नेतृत्व का परिचय दिया।

पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण

प्रतिभा पाटिल की नियुक्ति ने ये स्पष्ट कर दिया कि भारतीय लोकतंत्र में स्त्रियों को भी बराबरी का हक़ है। यह पल विशेष रूप से महिलाओं, बेटियों और उन माताओं के लिए बेहद प्रेरणादायक था जो अपनी बच्चियों को पढ़ाना चाहती हैं। उन्हें आगे बढ़ते देखना चाहती हैं। 

श्रीमती प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल (2007-2012) महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। उन्होंने न केवल एक महिला के रूप में इस गरिमामयी पद की शोभा बढ़ाई, बल्कि अपनी दूरदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण से इसे और भी ऊँचा उठाया।

आज जब हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। तो प्रतिभा पाटिल की यह उपलब्धि हमें दृढ़ संकल्प, शिक्षा और ईमानदारी के महत्व की याद दिलाती है। यह दिन उन तमाम महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो किसी न किसी रूप में समाज को बदलना चाहती हैं। 

उनकी यह उपलब्धि केवल इतिहास में दर्ज नहीं है। बल्कि आज के भारत की दिशा और सोच को भी आकार देती है। आज, जब हम इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हैं। तो यह सिर्फ़ एक व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना नहीं है। यह उस भावना को सलाम करना है जो भारत को महान बनाती है – वो भावना जो हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अधिकार देती है। चाहे वो कहीं से भी आता हो या उसकी लैंगिक पहचान कुछ भी हो।

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25 जुलाई 2007 भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का वह स्वर्णिम पन्ना है जिसमें एक महिला अपनी मेहनत ईमानदारी और निष्ठा के बल पर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँची। यह दिन हर भारतीय के लिए एक आत्मगौरव और उम्मीद का प्रतीक है। ये वाकई हर भारतीय के लिए एक गौरवपूर्ण पल था, और रहेगा!

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Ankit Maurya is a content writer who loves learning and sharing knowledge in all areas of education — from technology and science to career tips and study guides. He writes to help students, learners, and curious minds grow and stay inspired..

Frequently Asked Questions


प्रतिभा पाटिल 25 जुलाई 2007 को भारत की 12वीं राष्ट्रपति बनीं और देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।

प्रतिभा पाटिल एक भारतीय राजनीतिज्ञ, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने 2007 से 2012 तक भारत की राष्ट्रपति के रूप में सेवा दी।

प्रतिभा पाटिल का राष्ट्रपति बनना भारतीय राजनीति और समाज में नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। यह हर महिला और लड़की के लिए प्रेरणा बना।

प्रतिभा पाटिल से पहले भारत में कोई भी महिला राष्ट्रपति नहीं बनी थी। वे पहली थीं।

प्रतिभा पाटिल ने 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया।

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